Sunday, November 28, 2010
colours
रंगों की दुनिया में नया नहीं हूँ..........बस कुछ समय के लिए हाथ में कूची कि जगह कलम आ गयी थी. फिर से गोते लगाने को तैयार हूँ..................लाल, हरे, नीले समंदर में..............मैं अपनी सब पेंटिंग पोस्ट करूँगा..........अभी हाथ पक्का करना है........पर....ओके...
Thursday, November 4, 2010
LOLITA EFFECT
मेरी पत्नी को लगता है कि मैं लम्पट हो गया हूँ. वोह मुझे बार बार याद दिलाती हैं कि मेरी शादी को ४ साल हो गए हैं और मैं एक बच्चे का पिता हूँ. इस बात से कोई फरक नहीं पड़ता कि मैंने किसी सोशल नेट वर्किंग साईट पर अपनी उम्र नहीं लिखी है. वोह मुझ पर फब्तियां कसने लगती है जब मैं अपने स्थूल उदर के फ्लैट टायरों को अन्दर खींचने कि कोशिश करता हूँ. मुझे ऐसा लगता है कि मैं बड़े तेजी से बूढ़ा हो रहा हूँ और मेरी बीवी शायद चाहती है कि यह काम जल्दी हो जाये ताकि वोह सेफ हो जाए.यार मैंने कभी यह नहीं सोचा था कि मैं इतनी जल्दी बड़ा हो जाऊंगा. अपने दिल के साथ जिस्म का कदम ताल गड़बड़ा रहा है. और दिल आज कल ऐसी हसरतें पाल बैठा है कि नुमायाँ होते ही जिस्म को बेहिसाब जूते पड़ेंगे. वैसे जूते मारने वाले लोगों में भी हम जैसे ही सुरमा होते हैं जो किसी और कि ख्वाहिश को इस उम्र में पूरा होते देख नहीं सकते.
मुझे आज कल दूर दर्शन कि न्यूज़ रिपोर्टर भी खूब सूरत लगने लगी हैं. जींस को मुझे लगता है कि लड़कियों के लिए अनिवार्य कर देना चाहिए क्योंकि इस पोशाक को पहनने से उनमे अपने जिस्म को तराशने और उसे शेप में रखने कि ललक पैदा होती है ...तो एक तरह से जींस स्वस्थ भारत का निर्माण कर रही है....और आँखों को अगर ऐसा कुछ रोज़ देखने को मिल जाए तो साइनेरिया मेरिटिमा सक्कस को खरीदने कि क्या ज़रूरत है? ....देखा आपने बुढ़ापे में मोतिया बिन्द का खतरा कम...और दिन बा दिन जवान होते जा रहे इस देश के करीब आने मौका मिलेगा सो अलग.
कई बार हम देखते हैं कि कोलेज के टीचर ज्यादा फिट और जवान दीखते है ...शरीर से और मन से भी. भाई क्यों न हो रोज़ रोज़ नयी नयी शिष्याओं को पाठ पढ़ाने का मौका जो मिलता है. और एक हम है जो अपनी जवानी नाली चक रोड के झमेलों में गर्क कर रहे हैं. आज कल किसी चैट साईट पर बैठता हूँ तो लगता है कि जैसे बात करने को कुछ नहीं है...नए नए शब्द नए नए विचार और नए नए तरीके छा गए हैं दोस्त बनाने के. मन मार के लाग आउट करना पड़ता है. दुनिया खूबसूरत होती जा रही है. मुझे तो कोई बदसूरत दीखता ही नहीं. शाम को जानी वाकर या ब्लैक डॉग साथ होते है और उस समय लगता है कि वियाग्रा का मूल तत्त्व कहीं हमारे अन्दर ही भरा पड़ा है. Adrinalin का रिसाव तेज़ हो जाता है और कुछ बेवक़ूफ़ बहादुर बगल के घरों कि नीची दीवार को फलांग जाते हैं.
मेरी बीवी कमर पे हाथ रख कर के घूर रही है..................शट डाउन करना पड़ेगा.....
हाँ श्रीमती जी बताइये ..क्या सेवा करूँ आपकी? नहीं....नहीं ..मैने दुर्गा शप्तशती का पाठ कर लिया था सुबह....
मुझे आज कल दूर दर्शन कि न्यूज़ रिपोर्टर भी खूब सूरत लगने लगी हैं. जींस को मुझे लगता है कि लड़कियों के लिए अनिवार्य कर देना चाहिए क्योंकि इस पोशाक को पहनने से उनमे अपने जिस्म को तराशने और उसे शेप में रखने कि ललक पैदा होती है ...तो एक तरह से जींस स्वस्थ भारत का निर्माण कर रही है....और आँखों को अगर ऐसा कुछ रोज़ देखने को मिल जाए तो साइनेरिया मेरिटिमा सक्कस को खरीदने कि क्या ज़रूरत है? ....देखा आपने बुढ़ापे में मोतिया बिन्द का खतरा कम...और दिन बा दिन जवान होते जा रहे इस देश के करीब आने मौका मिलेगा सो अलग.
कई बार हम देखते हैं कि कोलेज के टीचर ज्यादा फिट और जवान दीखते है ...शरीर से और मन से भी. भाई क्यों न हो रोज़ रोज़ नयी नयी शिष्याओं को पाठ पढ़ाने का मौका जो मिलता है. और एक हम है जो अपनी जवानी नाली चक रोड के झमेलों में गर्क कर रहे हैं. आज कल किसी चैट साईट पर बैठता हूँ तो लगता है कि जैसे बात करने को कुछ नहीं है...नए नए शब्द नए नए विचार और नए नए तरीके छा गए हैं दोस्त बनाने के. मन मार के लाग आउट करना पड़ता है. दुनिया खूबसूरत होती जा रही है. मुझे तो कोई बदसूरत दीखता ही नहीं. शाम को जानी वाकर या ब्लैक डॉग साथ होते है और उस समय लगता है कि वियाग्रा का मूल तत्त्व कहीं हमारे अन्दर ही भरा पड़ा है. Adrinalin का रिसाव तेज़ हो जाता है और कुछ बेवक़ूफ़ बहादुर बगल के घरों कि नीची दीवार को फलांग जाते हैं.
मेरी बीवी कमर पे हाथ रख कर के घूर रही है..................शट डाउन करना पड़ेगा.....
हाँ श्रीमती जी बताइये ..क्या सेवा करूँ आपकी? नहीं....नहीं ..मैने दुर्गा शप्तशती का पाठ कर लिया था सुबह....
ITNE RAAM KAHAN SE LAAUN?
घर घर रावण , हर घर लंका , कैसे मैं इस तम को मिटाऊं ,
कलयुग की इस रामायण में इतने राम कहाँ से लाऊं ?
सीता अब भी अर्ध नग्न है,रावण अब भी है अपहर्ता ,
जनक नंदिनी अन्वेषण , को हनुमत शक्ति कहाँ से पाऊं ?
राम तुम्हारे कारण देखो ,न्यायालय में युद्ध छिड़ा है,
जीत तुम्हारी हो रघुराई , ऐसा न्यायी किसे बनाऊं ?
कोई इन्द्र नहीं सम्मुख है,युद्ध कहाँ है हे रघुनन्दन ,
किस कारण दधीचि प्रेरित हो, मैं अपनी अस्थियाँ गलाऊं ?
क्या पाया तुमने वन जा कर, यश , पत्नी या संतति सेवा,
क्यों तुमको आदर्श बना कर, मैं तुम जैसा ही दुःख पाऊं?
तुम लौटे बनवास बिता कर ,अवध पुरी ने दीप जलाये,
वैदेही की अग्नि परीक्षा, के छालों को किसे दिखाऊं?
नहीं अनुज लक्षमण सा मिलता ,नहीं भरत सा कोई भाई ,
नहीं तात जब दशरथ जैसा, कुल मर्यादा यश क्या गाऊं ?
जग दीवाली मना रहा है, राम तुम्हारे घर आने पर,
मेरा भी मन है एक दीपक ,राम तुम्हारे साथ जलाऊं .
कलयुग की इस रामायण में इतने राम कहाँ से लाऊं ?
सीता अब भी अर्ध नग्न है,रावण अब भी है अपहर्ता ,
जनक नंदिनी अन्वेषण , को हनुमत शक्ति कहाँ से पाऊं ?
राम तुम्हारे कारण देखो ,न्यायालय में युद्ध छिड़ा है,
जीत तुम्हारी हो रघुराई , ऐसा न्यायी किसे बनाऊं ?
कोई इन्द्र नहीं सम्मुख है,युद्ध कहाँ है हे रघुनन्दन ,
किस कारण दधीचि प्रेरित हो, मैं अपनी अस्थियाँ गलाऊं ?
क्या पाया तुमने वन जा कर, यश , पत्नी या संतति सेवा,
क्यों तुमको आदर्श बना कर, मैं तुम जैसा ही दुःख पाऊं?
तुम लौटे बनवास बिता कर ,अवध पुरी ने दीप जलाये,
वैदेही की अग्नि परीक्षा, के छालों को किसे दिखाऊं?
नहीं अनुज लक्षमण सा मिलता ,नहीं भरत सा कोई भाई ,
नहीं तात जब दशरथ जैसा, कुल मर्यादा यश क्या गाऊं ?
जग दीवाली मना रहा है, राम तुम्हारे घर आने पर,
मेरा भी मन है एक दीपक ,राम तुम्हारे साथ जलाऊं .
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