Thursday, November 4, 2010

ITNE RAAM KAHAN SE LAAUN?

घर घर रावण , हर घर लंका , कैसे मैं इस तम को मिटाऊं ,
कलयुग की  इस रामायण में इतने राम कहाँ से लाऊं ?
सीता अब भी अर्ध नग्न  है,रावण अब भी है अपहर्ता ,
जनक नंदिनी अन्वेषण , को हनुमत शक्ति कहाँ से पाऊं ?
राम तुम्हारे कारण देखो ,न्यायालय में युद्ध छिड़ा है,
जीत तुम्हारी हो रघुराई , ऐसा न्यायी  किसे बनाऊं ?
कोई इन्द्र नहीं सम्मुख है,युद्ध कहाँ है हे रघुनन्दन ,
किस कारण  दधीचि प्रेरित हो, मैं   अपनी अस्थियाँ गलाऊं ?
क्या पाया तुमने वन जा कर, यश , पत्नी या संतति सेवा,
क्यों तुमको आदर्श बना कर, मैं तुम जैसा ही दुःख पाऊं?
तुम लौटे बनवास बिता कर ,अवध पुरी ने दीप जलाये,
वैदेही की  अग्नि परीक्षा, के छालों को किसे दिखाऊं?
नहीं अनुज लक्षमण सा मिलता ,नहीं भरत सा कोई भाई  ,
नहीं तात जब दशरथ जैसा,  कुल मर्यादा यश क्या   गाऊं ?
जग दीवाली मना रहा है, राम तुम्हारे घर आने पर,
मेरा भी मन है एक दीपक ,राम तुम्हारे साथ जलाऊं .

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