Saturday, October 2, 2010

तो क्या इस साल दिवाली जल्दी आ गयी है? क्या कहा? अभी नहीं? अरे ज़रा आवाज़ दबा के बोलिए. कहीं इस देश कि महिलाओं ने सुन लिया तो रंजना कुमारी,मधु किश्वर,वृंदा करात,सुषमा स्वराज,जया प्रदा , अम्बिका सोनी से खूब पिटाई लग्वायेंगी.बाद में सोनिया गाँधी आ कर अगर आपके पजामे के नाड़े में पटाका लगा दे तो फिर मत कहियेगा. अपना कैलेंडर ज्ञान सुधारिए. दिवाली आ गयी गई. इस देश कि आधी आबादी कि दिवाली ९ मार्च को राज्य सभा में महिला आरक्षण बिल पारित होने के साथ ही आ गयी गई है. पर क्या लक्ष्मी पूजन का समय भी निश्चित हो गया है? हाँ ...हां..ठीक है , अभी नहीं हुआ है पर हो जायेगा,
पता नहीं मुस्लिम , दलित और पिछड़ी औरतों का क्या होगा पर इतना तो तय है कि कम से कम  कोई कमाल अख्तर,राजनीति प्रसाद वगैरह उनके हाल को पूछने नहीं जायेंगे. उनका काम गिलास तोड़ कर के ही ख़तम हो गया है गोया कि कांच के बने थे सारे नियम कायदे जो टूट गए और हमारी बेहयाई सारी कौम ने देख ली. अक्सर मेरे पास मेरे दफ्तर में कई औरतें शिकायत ले के आती हैं कि उनका मर्द बहुत शराब पीता है और पता नहीं शराब में कौन से दवा  मिला लेता है कि पीते ही उसकी मर्दानगी जाग जाती है और वोह मुझे डब्लू डब्लू ऍफ़ का प्रतिद्वंदी पहलवान समझ कर पीटने लगता है. गावं के ही खिलाडी,बच्चा राम,मैकू आदि ने उसकी मति भ्रस्ट कर दी है. मेरे पास भी उनकी इस कुश्ती का कोई तोड़ नहीं होता. पति को छोड़ा नहीं जा सकता और सुधारना तो उससे भी बड़ा मुश्किल काम है. तो क्यों न पति को वहीँ छोड़ कर महिलाएं ही आगे बढ़ जाए. पति और पुरुष अपने आप पीछे आयेंगे.

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