कल १८ जनवरी है. मेरी शादी को कल ३ साल पुरे हो रहे हैं. अभी थोड़ी देर पहले मैं अपनी पत्नी से पूछ रहा था कि हम दोनों एक साथ अभी खुश हैं या कि शादी के पहले खुश रहा करते थे. उसने कहा कि जवाब तुम्हे मालूम है. हर एक उस पल जब हम दोनों एक दूसरे को समझ नहीं पाए और कहा कि मैं कहाँ आ कर फंस गयी तुम्हारे साथ....तो मैने भी उसका जवाब यही कह कर के दिया कि मैं भी तुम्हे झेल रहा हूँ. पर चाहे जैसे भी हो हम ३ सालों से साथ हैं और आगे भी कम से कम मेरे लिए तो कोई उम्मीद नहीं है. पर एक बात और भी है...अगर अभी आज हम दोनों को आप्शन मिले कि जाओ टेक अ न्यू डिसीज़न...तब भी हम दोनों थक हार के एक दूसरे के ही पास आयेंगे. पिछले ३ सालों में हम दोनों एक दूसरे की कमियों और खूबियों के इतने आदि हो चुके हैं कि औब कहीं और लाइफ spaici नहीं लगती. इंडियन शादिओं कि यह एक बात बड़ी ख़ास है कि आपके आप्शन बड़ी जल्दी ख़तम हो जाते हैं और हम दोनों चाहे जितनी भी अडवांस क्यों न हो मियां और बीवी जैसा न केवल बिहैव करते हैं बल्कि सोचने भी लगते हैं. और एक मियां के अपनी कुछ सर्टेन ख्वाहिशें होती हैं जिन्हे बीवी एस अ rutene पूरा करती है और बीवी के तौर पे उसकी कुछ फरमाइश और खरी खोटी होती है जिसे नॉर्मली मियां बहुत कजुअली लेता है. हाँ मैं यह बात मानता हूँ कि हम दोनों एक गाडी के दो पहिये हैं...पर गाडी चलेगी तब न जब दोनों पहिये एक ही दिशा में चले नहीं तो गाडी एक जगह पे खड़ी रखने का क्या फायदा है? हमारी गाडी मूव तो करती है पर वापस आकर उसी पार्किंग में खड़ी हो जाती है. पर ३ साल में ज्यादा उम्मीद भी तो नहीं कर सकते न. अगर में मेरी बीवी से चाहूँगा तो मुझे भी देना पड़ेगा न. तो भैया अच्छा है कि स्पीड नोर्मल ही रहने दो. वैसे एक बात है...बीवी के रूप पे मानो आपको एक खाली स्टेज मिल जाता है जहाँ आप कुछ भी अनाप शनाप कहते रहो कोई आपको सड़े अंडे टमाटर या जूते नहीं मारता और आप तसल्ली से अपनी सारी गन्दगी उड़ेल कर हलके हो जाते हैं. हैं न अच्छी बात.अलग अलग जगह से आने और अलग होने के बाद भी जिस तरह से दो रंगों को मिला कर एक नया रंग बनता है उसी तरह से लाइफ एक अजीब से नए रंग में रंग जाती है जिसे आपने पहले कभी नहीं देखा होता है. आपका रंग होता तो है पर बगल में किसी दूसरे शेड के साथ.
तीन सालों में हमने अलग अलग एक दूसरी को क्या दिया या कितना दिया उस पर तो कभी सहमति नहीं बन पायी पर हम दोनों ने मिल एक दूसरे को एक अनमोल गिफ्ट दिया है और वोह है हमारा डेढ़ बरस का बेटा. अब तो अगर हम दोनों में से किसी को चिल्लाना भी होता है तो यह सोच कर चुप रह जाते है कि बेटा कॉपी करेगा .वैसे बेटा सेफ्टी वोल्व का काम करता है. एक दूसरे से गुस्सा हम दोनों उसको देख कर हंस पड़ते हैं...और फिर अपने अपने काम में. यह सच है कि शादी के बाद नया करने कि गुंजाईश कम हो जाती पर लाइफ में ठहराव आ जाता है और हम निश्चिन्त हो जाते हैं कि चलो कम से कम हम अब घर बार वाले हो गए और लाइफ कि बहुत सारी प्राथमिकतायें बदल जाती हैं. मैने उसके हिसाब से खुद को कितना बदला है यह मैं नहीं कह सकता....पर इतना ज़रूर है कि अब घर आकर मैं सेफ फील करता हूँ. मैं मेरे बीवी और बेटे को मिस करता हूँ जब भी वो बहार होते हैं, मुझे उनकी चिंता होती है यह और बात है कि सामने आते ही फिर पहले जैसे हो जाता है.पर ऐसा कोई मेरे साथ ही थोड़ी होता होगा? है न? ऋचा ने खुद को मेरे हिसाब से बहुत बदला है और मेरी पसंद कि चीजों को करने कि कोशिश भी की है..अब अभी करती है....मैं बहुत क्रिटिकल हूँ और उसको हर बात में तारीफ़ चाहिए....एक मान के रूप में , एक कम्पनिओन के रूप में और अब एक पत्नी के रूप में भी उसने धीरे धीरे अपनी जगह पक्की कर ली है.....
2 comments:
शादी की साल गिरह मुबारक हो ..न शादी मैं बुलाया...
.न घर बुलया ,,
,न बीबी से मिलवाया ,
..नहीं बच्चे से ..
बड़े कमीने दोस्त हो
पर जो तुमेहं झेल रहा हो उसके प्रति पूरी संवेदना रखते हुए पुनः
शादी की साल गिरह की शुभ कामनाएं
Thanks for inviting me to read your blog...but i am not able to understand why now at this stage when u have completed 3 yrs of your married life you are giving thought to some thing which i think you shouldn't...any ways atleast there is one good thing that now you have learnt to compromise for others which were not there earlier in you nature...Good !!!
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