नयी गाडी खरीद कर रमेश बहुत खुश था. लाल रंग के शानदार चमकती हुई. आस पड़ोस में किसी ने भी नहीं खरीदी थी. माध्यम वर्ग की कुछ साबित करने कि खलिश इस देश कि मार्केट कि बड़ी मदद करती है. रोज़ कि तरह ही बिना ज्यादा गन्दी हुए ही गाड़ी कि धुलाई चल रही थी और ५ साल का बेटा पास में खेल रहा था....खेल खेल में उसने नयी गाड़ी पे खरोंच मार दी. पिता का परा चढ़ गया. बेटा दुश्मन लगने लगा. रिंच उठा कर बेटे का हाथ पत्थर पर रखा और कई चोट कर दी. बेटा बिलखने लगा. बाप का दिल नहीं पसीजा. कुछ देर बाद बेटे कि हिचकियाँ बंध गयी. फ़र्ज़ निभाया....बेटे को अस्पताल ले गए. डॉक्टर ने कहा चोट गहरी है. उंगलिया काटनी पड़ेगी. बाप तो मनो बुत बन गया. बेटे हो होश आया. अपनी कटी उँगलियों वाले हाथ में पट्टी बंधी देखी. पूछा. पापा मेरे नयी उंगलियाँ कब आएँगी?
चीज़ें इस्तेमाल करने और लोग प्यार करने के लिए होते है......न कि चीज़ें प्यार करने और लोग इस्तेमाल करने के लिए...
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